रज़िया सुल्तान के बाद कौन बना दिल्ली का शासक? | History in Hindi

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रज़िया सुल्तान के शासन के बाद मुइज़ुद्दीन बहराम शाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा। उसने लगभग 1240 से 1242 ई. तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। बहराम शाह, शम्सुद्दीन इल्तुतमिश का पुत्र था और रज़िया सुल्तान के बाद दिल्ली का सुल्तान बना।

हालांकि, बहराम शाह भी लंबे समय तक अपनी सत्ता को मजबूत बनाए रखने में सफल नहीं रहा। उस समय दिल्ली सल्तनत के प्रभावशाली अमीरों और तुर्की सरदारों का राजनीतिक हस्तक्षेप काफी बढ़ चुका था। दरबार में लगातार होने वाले सत्ता संघर्षों के कारण सुल्तान की स्थिति कमजोर होती गई। अंततः बहराम शाह को भी सत्ता से हटा दिया गया।

History in Hindi के दृष्टिकोण से रज़िया सुल्तान के बाद का यह दौर दिल्ली सल्तनत के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण है। यह काल दरबार में बढ़ते राजनीतिक संघर्ष, अमीरों के प्रभाव और कमजोर केंद्रीय शासन को समझने में मदद करता है।

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मुईज़ुद्दीन बहराम शाह का शासनकाल

History in Hindi में दिल्ली सल्तनत के इतिहास की चर्चा करते समय मुईज़ुद्दीन बहराम शाह का शासनकाल भी महत्वपूर्ण माना जाता है। रज़िया सुल्तान के शासन के समाप्त होने के बाद उनके भाई मुईज़ुद्दीन बहराम शाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया। वह शम्सुद्दीन इल्तुतमिश के पुत्र और रज़िया सुल्तान के भाई थे। उन्होंने लगभग 1240 ईस्वी से 1242 ईस्वी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया।

बहराम शाह को सत्ता तक पहुँचाने में प्रभावशाली तुर्क अमीरों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। लेकिन सुल्तान बनने के बाद बहराम शाह ने अपनी स्वतंत्र शक्ति स्थापित करने की कोशिश की। इससे उसके और शक्तिशाली तुर्क अमीरों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।

रज़िया सुल्तान और अल्तूनिया से संघर्ष History in Hindi

,रज़िया सुल्तान दिल्ली की सत्ता दोबारा हासिल करना चाहती थीं। उन्होंने अपने पति मलिक अल्तूनिया के साथ मिलकर बहराम शाह के विरुद्ध अभियान चलाया।

अक्टूबर 1240 ईस्वी में बहराम शाह की सेना और रज़िया तथा अल्तूनिया की सेना के बीच संघर्ष हुआ। इस लड़ाई में रज़िया और अल्तूनिया को हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद दोनों कैथल की ओर चले गए। History in Hindi इतिहास में प्रचलित एक मत के अनुसार, रज़िया सुल्तान और अल्तूनिया की हत्या कैथल के आसपास डाकुओं ने कर दी थी।

मंगोलों का लाहौर पर आक्रमण

बहराम शाह के शासनकाल में दिल्ली सल्तनत को मंगोलों के आक्रमण का भी सामना करना पड़ा। 1241 ईस्वी में मंगोलों ने लाहौर पर हमला किया और शहर पर अपना अधिकार कर लिया। इस आक्रमण से दिल्ली सल्तनत को काफी नुकसान हुआ और उसकी सीमाओं पर मंगोल खतरा और गंभीर हो गया।

तुर्क अमीरों के साथ संघर्ष

बहराम शाह के शासनकाल की सबसे बड़ी राजनीतिक समस्या उसके अपने अमीरों से जुड़ी हुई थी। शक्तिशाली तुर्क सरदार सुल्तान के शासन में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते थे। दूसरी तरफ बहराम शाह उनके नियंत्रण से बाहर निकलकर अपनी सत्ता मजबूत करना चाहता था।

इस सत्ता संघर्ष के कारण दरबार में अस्थिरता बढ़ती गई। आखिरकार तुर्क अमीरों ने बहराम शाह के खिलाफ विद्रोह कर दिया और उसकी सत्ता समाप्त कर दी।

बहराम शाह की मृत्यु

लगभग दो वर्ष तक शासन करने के बाद 1242 ईस्वी में बहराम शाह को गद्दी से हटा दिया गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस प्रकार उसका शासनकाल बहुत छोटा रहा।

बहराम शाह के कितने बच्चे थे?

बहराम शाह के बच्चों की संख्या के बारे में विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोतों में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है। इसलिए यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि उसके कितने पुत्र या पुत्रियाँ थीं।

बहराम शाह का उत्तराधिकारी

बहराम शाह की मृत्यु के बाद उसके भतीजे अलाउद्दीन मसूद शाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया। अलाउद्दीन मसूद शाह, बहराम शाह के भाई रुकनुद्दीन फिरोज शाह के पुत्र थे।

उन्होंने 1242 ईस्वी से 1246 ईस्वी तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। इसके बाद उन्हें भी सत्ता से हटा दिया गया और नासिरुद्दीन महमूद शाह दिल्ली का सुल्तान बना।

दिल्ली सल्तनत के शासकों का क्रम

रज़िया सुल्तान (1236–1240 ई.) → मुईज़ुद्दीन बहराम शाह (1240–1242 ई.) → अलाउद्दीन मसूद शाह (1242–1246 ई.) → नासिरुद्दीन महमूद शाह (1246–1266 ई.)

History in Hindi में बहराम शाह का शासनकाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके समय दिल्ली सल्तनत को एक साथ आंतरिक सत्ता संघर्ष और मंगोलों के बाहरी खतरे का सामना करना पड़ा।

 

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